सरसों की नई किस्म के बारे में
पीली सरसों की उन्नत किस्म - ज्यादा फलियां, 30-35% अधिक तेल, 125 दिन में पककर तैयार।
उपयुक्त जलवायु
गर्म और पर्याप्त नमी वाली परिस्थितियां सरसों की नई किस्म के लिए उपयुक्त होती हैं। जलभराव से बचाव जरूरी है।
मिट्टी का चयन
। मिट्टी की अच्छी जल निकासी महत्वपूर्ण है।
बुवाई का समय
। स्थानीय मौसम एवं कृषि विभाग की सलाह को ध्यान में रखें।
अच्छी किस्म कैसे चुनें?
हर क्षेत्र के लिए एक ही किस्म उपयुक्त नहीं होती। अपने क्षेत्र की मिट्टी और मौसम के अनुसार चयन करें।
प्रमाणित बीज
विश्वसनीय स्रोत से प्रमाणित एवं अच्छी गुणवत्ता वाला बीज चुनें।
क्षेत्र के अनुसार
अपने क्षेत्र की मिट्टी, मौसम और वर्षा के अनुसार किस्म का चयन करें।
रोग सहनशीलता
जहां उपलब्ध हो वहां स्थानीय रूप से अनुशंसित रोग सहनशील किस्मों को प्राथमिकता दें।
सरसों की नई किस्म की किस्म, बुवाई की अवधि और बीज की मात्रा आपके जिले के अनुसार अलग हो सकती है। स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से पुष्टि करें।
सरसों की नई किस्म की खेती कैसे करें?
खेत तैयार करने से लेकर कटाई तक जरूरी चरण
खेत की तैयारी
मिट्टी की स्थिति के अनुसार खेत तैयार करें। खेत को समतल रखें और जल निकासी की व्यवस्था करें।
बीज का चयन और उपचार
प्रमाणित बीज चुनें और बुवाई से पहले अनुशंसित बीज उपचार करें।
बुवाई
सही नमी और उपयुक्त समय पर बुवाई करें। पंक्ति एवं बीज दूरी स्थानीय सलाह के अनुसार रखें।
खाद और पोषण
मिट्टी परीक्षण के आधार पर संतुलित खाद एवं उर्वरक का उपयोग करें।
खरपतवार नियंत्रण
फसल के शुरुआती विकास में खरपतवार को नियंत्रित करें और खेत की नियमित निगरानी करें।
सिंचाई और जल निकासी
सूखे की स्थिति में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें और खेत में पानी जमा न होने दें।
रोग और कीट निगरानी
पौधों की नियमित जांच करें। समस्या दिखाई देने पर सही पहचान के बाद नियंत्रण करें।
कटाई और भंडारण
सही समय पर कटाई करें। दानों को सुखाकर साफ, सूखी और सुरक्षित जगह पर रखें।
खेत की तैयारी
बीज उपचार और बुवाई
खाद व पोषण प्रबंधन
सिंचाई प्रबंधन
खरपतवार नियंत्रण
रोग और कीट प्रबंधन
कटाई व भंडारण
अच्छी पैदावार के लिए सुझाव
सही किस्म
अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित और प्रमाणित बीज का उपयोग करें।
सही समय पर बुवाई
पर्याप्त मिट्टी की नमी होने पर समय पर बुवाई करें।
फसल की निगरानी
खेत में रोग, कीट और जलभराव की नियमित जांच करते रहें।
बीज की मात्रा, खाद की खुराक, दवा और बुवाई के समय की सिफारिशें क्षेत्र एवं मौसम के अनुसार बदल सकती हैं। किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले उसके लेबल की जानकारी और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।